March 30, 2012
A Favourite Occupation of 21st Century
Hunting a Mosquito
Update: This video is a bit outdated. Two is not enough for one. You need many more. You need a whole swarm.
March 27, 2012
March 25, 2012
Psychopaths of the World, Unite!
There is nothing to lose but your humanity (if there is any).
Don’t hesitate. There is plenty of corporate and official support available.
Join the NOEP (Network Of Ecumenical Psychopaths).
Sorry. Wrong construction. It should have been ENOP (Ecumenical Network Of Psychopaths).
March 24, 2012
The Angels of 21st Century
Exposed: Inside the NSA’s Largest and Most Expansive Secret Domestic Spy Center in Bluffdale, Utah
NSA Whistleblower Thomas Drake Prevails Against Charges in Unprecedented Obama Admin Crackdown
Or is it Gods?
March 23, 2012
More Good Citizens of 21st Century
To those who claim there is no untouchability in India
***
कोई: तो आपका क्या विचार है इस बारे में?
पहला: अरे, ये फ़ालतू के लोग हैं। बस मूवी देखते हैं और नाच-गाना करते हैं। इनके बस का कुछ नहीं है।
दूसरा: हाँ, पता चला इसे बनाते-बनाते कीन्या पहुँच गए।
तीसरा: जाते थे फ़र-आंस, पहुँच गए कीन्या, समझ गए ना।
चौथा: मुझे तो वो जोक पसंद आया – के. आर. नारायणन वाला। पता चला झंडा फ़हराते-फ़हराते खंभे पर चढ़ गए।
पांचवाँ: हिंदू बुरा, मुसलमान बुरा, सिख बुरा, ईसाई बुरा, और तो और कम्यूनिस्ट भी बुरा।
छठा: ये अपने-आप को समझते क्या हैं – भगवान?
सातवाँ: हाँ, अनल-हक़, अनल-हक़ लगा रक्खा है।
आठवाँ: दो लपाटे लगाओ इनके, दिमाग़ ठिकाने आ जाएगा।
नवाँ: इनको भी लव-ट्रम शो में डाल दिया जाए तो कैसा रहे?
दसवाँ: ये जो हीरो बन रहे हैं ना, इनको ज़ीरो बना के छोड़ देंगे।
ग्यारहवाँ: इनको यहाँ बुला लो। ऐसी-ऐसी कहानियाँ सुनवाएंगे, ऐसी-ऐसी गवाहियाँ दिलवाएंगे, इनका सिर चकरा जाएगा।
बारहवाँ: उसके बाद यही गाते रहेंगे – झूठ सच का क्या पता है, भला बुरा है, बुरा भला है।
तेरहवाँ: सही है। जब इनकी हर बात, इनके हर काम पर हज़ार आदमी नज़र रखेगा और हज़ार आदमी इनको पाठ पढ़ाने, इनका दिमाग़ दुरुस्त करने के लिए तैनात रहेगा और इनको पता भी नहीं चलेगा कि हो क्या रहा है इनके साथ, तो सारी हेकड़ी निकल जाएगी।
चौदहवाँ: एक आदमी पीछे लग जाए तब तो लोगों की जान निकल जाती है। डर मूवी बन जाती है, केप फ़ियर बन जाता है।
पंद्रहवाँ: एंड गेम हो जाएगा इनका।
March 21, 2012
March 6, 2012
खा गया!
खा गया! खा गया! खा गया!
कौन खा गया? नेता खा गया क्या?
खा गया! खा गया! खा गया!
कौन खा गया भई? बड़ा अफ़सर खा गया?
खा गया! खा गया! खा गया!
अरे बताओ तो कौन खा गया? करोड़पति?
अरे नहीं यार! वो ही वाला खा गया!
मतलब कौन? अरबपति खा गया?
तुम क्यों इन बिचारों के पीछे पड़े रहते हो?
तो बता भी दो कि कौन खा गया
वही मरियल डेढ़ पसली का कंगाल खा गया!
अच्छा ये बताओ कि क्या खा गया?
कुछ मत पूछो भई! बड़ी बुरी बात है
अरे बता भी दो यार जब इतना बताया है
क्या बताएँ! बताते हुए भी शर्म आती है
पहले तो बड़ी मुश्किल से कमाया कुछ पैसा
वो भी बुढ़ापे में आकर, इतना तो बेशरम है
अभी गिनती भर दिन हुए नहीं कमाते-कमाते
इधर-उधर बिना-बात बेहिसाब पैसा बहा गया
ऊपर से अपने ही घर में, अपने ही हाथ से
बनाए हुए बासी चावल में मिला के बासी दाल
सिर्फ़ दो टाइम का खाना, चार छोड़ो, पाँच छोड़ो
छः-छः टाइम तक खा गया! खा गया! खा गया!
***
और खरबपति का क्या हुआ?
ये अच्छा याद दिलाया तुमने!
कुछ मूड सुधरेगा इसी बात से
अरे भई खरबपति साहब के यहाँ
अभी तक पता ही नहीं तुम्हें?
एक सुंदर सा खरबपति बेटा हुआ है!
तभी तो प्रसाद लाने भेजा था मुझे!
पर धत्तेरे की! इतनी कोशिश कर ली
इस मरियल से ध्यान ही नहीं हटता!
आजकल तो बस यही बजता रहता है
खा गया! खा गया! खा गया!










