कृत्रिम वंदन और अकृत्रिम कृंदन
का भार उठा लिया जा सकता है
माथे पर लगा कर
तेजस्वी तिलक और स्पन्दित चंदन
हाथों में लेकर चांदी का कलश
जिसमें भरा हो मुद्रित कुंदन
किंतु हृदय करता है हठ
कि नहीं रहना है इस मठ
चाहे बैठा हो सर्वत्र
घेर लेने के लिए
वृहत्तर निर्द्वन्द्व निरानंद बंधन
[2009]










