चलो बहुत हो गया
कसाई और बकरे का झगड़ा
अब हाथ मिला लेते हैं
आज से हमारी-तुम्हारी दुश्मनी खत्म
आगे वही बढ़ते हैं
जो साथ मिल के चलते हैं
अब से हम-तुम भी साथ-साथ चलेंगे
मिल-जुल के सफ़र करेंगे
बहुत से हैं दुनिया में
जो झिक-झिक में वक़्त ज़ाया करते हैं
या फिर बड़ी-बड़ी बातें किया करते हैं
जहाँ भाई-चारे से काम चल सकता है
वहाँ बेकार की बहस में लगे रहते हैं
हमने भी यह ग़लती की अब तक
चलो आज से इसे सुधार लेते हैं
एक-दूसरे से कड़वी बातें नहीं कहेंगे
प्यार-मुहब्बत से ज़िंदगी भर रहेंगे
न तुम हमें काटो
न हम तुम्हें काटेंगे
ये एक-दूसरे को काटना खत्म
एक नये युग की शुरुआत करेंगे
दुनिया है और दुनिया में ज़िंदगी है
तो कटना-काटना तो होता ही रहेगा
पर अब मिल-जुल कर काटा करेंगे
कभी बकरा मिलेगा तो कभी कसाई मिलेगा
पर एकता की ताक़त के सामने कौन टिकेगा?










