अनिल एकलव्य ⇔ Anil Eklavya

March 17, 2009

पेट की चीख़

प्रतिक्षण प्रतीक्षा का प्रहार
साहबों के गले में फूलों का हार
बासी खिचड़ी और अधसड़ा अचार
प्यास से गठबंधित पेय
और भूख से हठबंधित आहार
चैन की नींद के फालूदे का जलता स्वाद

तृप्त शरीरों और तरोताज़ा चेहरों की गुफ़्तगू
नहा कर नये कपड़े पहने शब्दों का
मंजे हुए दांतों, घिसी हुई जीभों और धुले-पुंछे होंठों से लेकर
तौलिये से रगड़कर साफ़ किए हुए कानों तक
कुशल यातायात प्रणाली के तहत आवागमन

पाचन तंत्र के रसों से घायल आमाशय
और सूखी-जली आँतों का घुटता हुआ दम
नींद की कमी से तिलमिलाते मस्तिष्क का
गले से होकर उतरता ही जाता गुस्सा

पर मानवी सभ्यता के मंदिर में भी गूंजता
और बाकी सभी शब्दों को ढक लेता हुआ
एक आदिम, बल्कि पाशविक उद्गम का,
लेकिन एकदम सभ्य सुसंस्कृत सवाल —
मेरे पेट की चीख़ सुनी तो नहीं किसी ने?

[2009]

March 14, 2009

Hait Hitler

We hait Hitler
No, no!
We don’t Hail Hitler
We Hait Hitler

Why?

Are you serious?

For God’s sake!

He looked like Charlie Chaplin
He walked like Charlie Chaplin
He talked like Charlie Chaplin

He even acted like Charlie Chaplin

Why else?

March 9, 2009

The Nurture of Torture

The boat that carries the coat of arms
The ship that appears in the clip of the war
The man with the tan who is selling the can
The bomb that was found while combing the tombs
The payroll that is likely to be here to stay
The culture of the future that is being conjectured
The flight of the light that is quietly disturbing
The line that is being drawn by the programmed spine
The key that is being typed and the key that is being pressed
The screen on the wall behind the tall stall
The wheels whirling on the broad hard road
The sheep with sharp teeth who think that they are deep
The tire of fire burning on a sticky or thick neck
The nurture of torture and the suited-booted butcher
The vision of official peepers creeping in every corner

Like blood sucking bugs and flesh eating birds
Like demolition cranes working ceaselessly in my brain
Like stacks of crushing bags loaded on my back

I want to go on working
But they are driving me to paralysis

Can you see them – can’t you see them?

They are doing something horrible
They are doing something horrible

[2009]

March 3, 2009

मरने के बाद

मरने के बाद क्या होना?
होना क्या? कुछ नहीं होना।
मतलब रोना-धोना नहीं होना
धोना तो बिल्कुल नहीं होना
भीड़ लगना नहीं होना
किसी को बुलाना नहीं होना
कोई खबर फैलाना नहीं होना
कोई सभा-भाषण नहीं होना
कोई पंडित-वंडित नहीं होना
कोई लकड़ी-घी नहीं होना
कोई नाम-वाम, सत्य-असत्य नहीं होना
कोई परेड-जुलूस नहीं होना
बस ऐसे-का-ऐसे गाड़ी में डालना
और सीधे जा के बिजली से जला देना
कोई तीन-दस-तेरह नहीं होना
कोई फूल-वूल नदी-वदी नहीं होना
राख को कहीं कूड़े में फेंक देना होना
और कुछ किसी हालत में नहीं होना

 

[2009]

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