अनिल एकलव्य ⇔ Anil Eklavya

March 3, 2009

मरने के बाद

मरने के बाद क्या होना?
होना क्या? कुछ नहीं होना।
मतलब रोना-धोना नहीं होना
धोना तो बिल्कुल नहीं होना
भीड़ लगना नहीं होना
किसी को बुलाना नहीं होना
कोई खबर फैलाना नहीं होना
कोई सभा-भाषण नहीं होना
कोई पंडित-वंडित नहीं होना
कोई लकड़ी-घी नहीं होना
कोई नाम-वाम, सत्य-असत्य नहीं होना
कोई परेड-जुलूस नहीं होना
बस ऐसे-का-ऐसे गाड़ी में डालना
और सीधे जा के बिजली से जला देना
कोई तीन-दस-तेरह नहीं होना
कोई फूल-वूल नदी-वदी नहीं होना
राख को कहीं कूड़े में फेंक देना होना
और कुछ किसी हालत में नहीं होना

 

[2009]

2 Comments »

  1. टिप्पणी भी नहीं होना..
    गुस्सा भी नहीं होना..
    मजाक होना!!!

    :)

    Comment by sameer lal — March 3, 2009 @ 10:23 am | Reply

  2. Lovely poem. This is true that …….

    कोई मरे या जिए
    जिन्दगी तो यूँ ही चलती रहती है
    बस रह जाती है याद
    जिंदगी भर रुलाने को

    Comment by gkindian — March 3, 2009 @ 10:57 am | Reply


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