अनिल एकलव्य ⇔ Anil Eklavya

March 23, 2012

More Good Citizens of 21st Century

Filed under: Uncategorized — anileklavya @ 11:44 pm

To those who claim there is no untouchability in India

 

***

 

कोई: तो आपका क्या विचार है इस बारे में?

पहला: अरे, ये फ़ालतू के लोग हैं। बस मूवी देखते हैं और नाच-गाना करते हैं। इनके बस का कुछ नहीं है।

दूसरा: हाँ, पता चला इसे बनाते-बनाते कीन्या पहुँच गए।

तीसरा: जाते थे फ़र-आंस, पहुँच गए कीन्या, समझ गए ना।

चौथा: मुझे तो वो जोक पसंद आया – के. आर. नारायणन वाला। पता चला झंडा फ़हराते-फ़हराते खंभे पर चढ़ गए।

पांचवाँ: हिंदू बुरा, मुसलमान बुरा, सिख बुरा, ईसाई बुरा, और तो और कम्यूनिस्ट भी बुरा।

छठा: ये अपने-आप को समझते क्या हैं – भगवान?

सातवाँ: हाँ, अनल-हक़, अनल-हक़ लगा रक्खा है।

आठवाँ: दो लपाटे लगाओ इनके, दिमाग़ ठिकाने आ जाएगा।

नवाँ: इनको भी लव-ट्रम शो में डाल दिया जाए तो कैसा रहे?

दसवाँ: ये जो हीरो बन रहे हैं ना, इनको ज़ीरो बना के छोड़ देंगे।

ग्यारहवाँ: इनको यहाँ बुला लो। ऐसी-ऐसी कहानियाँ सुनवाएंगे, ऐसी-ऐसी गवाहियाँ दिलवाएंगे, इनका सिर चकरा जाएगा।

बारहवाँ: उसके बाद यही गाते रहेंगे – झूठ सच का क्या पता है, भला बुरा है, बुरा भला है।

तेरहवाँ: सही है। जब इनकी हर बात, इनके हर काम पर हज़ार आदमी नज़र रखेगा और हज़ार आदमी इनको पाठ पढ़ाने, इनका दिमाग़ दुरुस्त करने के लिए तैनात रहेगा और इनको पता भी नहीं चलेगा कि हो क्या रहा है इनके साथ, तो सारी हेकड़ी निकल जाएगी।

चौदहवाँ: एक आदमी पीछे लग जाए तब तो लोगों की जान निकल जाती है। डर मूवी बन जाती है, केप फ़ियर बन जाता है।

पंद्रहवाँ: एंड गेम हो जाएगा इनका।

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