अनिल एकलव्य ⇔ Anil Eklavya

July 20, 2013

Covers for War and War Crimes

Filed under: Uncategorized — anileklavya @ 5:54 am

Time Magazine Cover | Jan. 2, 1939

(Man of the Year: 1938)

State Police photographer releases bloody Tsarnaev photos to Boston Magazine

(A Noble Revelation)

Photographer who released Tsarnaev capture images suspended

(Featured Comments)

Floyd: Rolling Stone magazine can’t make a killer cool

(Monster of the Year: 2013)

(So There Has Been Progress)

Henry Kissinger (on Time Magazine Cover) | Feb. 14, 1969

(Now That’s What We Call a Hero)

America Keeps Honoring One of Its Worst Mass Murderers: Henry Kissinger

(The Self-Serving Cowards)

Henry Kissinger: War Criminal or Old-Fashioned Murderer?

America Keeps Honoring One of Its Worst Mass Murderers: Henry Kissinger

(Losers Whining in Their Panic Room)

World’s Most Evil And Lawless Institution?

(But These Lives Don’t Count)

(Why Are You Complaining?)

Bush’s Useful Idiots

(And We Have a War Going On)

(That Will Go On Indefinitely)

On His 95th Birthday, the Story of Nelson Mandela’s Struggle Told Outside His Old Soweto Home

(But We Are Not Heartless!)

(Haven’t We Pardoned This Terrorist?)

“The Act of Killing”: New Film Shows U.S.-Backed Indonesian Death Squad Leaders Re-enacting Massacres

(These People Are Not Enjoying Their Old Age in Peace)

(They are Broken and Tormented At The End)

(Our Hero Kissinger Dies Happy)

(He Was Not Tormented At All)

(These Are Uneducated People)

(We Are Smart And Sophisticated)

(Have We Sinned? We Have Not.)

Suicide bomber kills 20 in Iraqi Sunni mosque

(And This Has Nothing to Do With Us)

(We Can’t Waste Our Time in Trying to Understand)

(Why and How a Tragedy Like This Happens)

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Car bombs and violence leave 46 dead in Iraq

 

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Pakistan government recorded killings from US drone strikes, document shows

 

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Al-Qaida claims Iraq prison raids which freed hundreds of inmates

(We Told You Al-Qaida was in Iraq)

(That’s Why We Attacked and Destroyed It)

 

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More than 1000 inmates escape from Libyan jail

(This Has Nothing to Do With Us Either)

 

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Day of Violence Kills 30 in Iraq

 

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Wave of car bomb attacks in Iraq

(You Have a Morbid Obsession with Death)

 

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‘King of romance,’ now an angry militant

(Totally Irrelevant. You Are Crazy.)

July 7, 2013

कोई बड़ी बात नहीं है

Filed under: Uncategorized — anileklavya @ 10:34 pm

– अगला आडमी बुलाओ।

– नैक्स्ट!

एक आदमी अपने काग़ज़ लेकर आगे आता है।

– क्या नाम है टुम्हारा?

– कीर्ति आज़ाद

– (एकदम गुस्से में खड़े होकर) साला बाग़ी! टुमको आज़ाडी मांगटा?

– नहीं साहब …

– साला, झूट बोलटा! ए सिपॉय सीटाराम!

– जी, हुज़ूर!

– इस बागी को उढर मैडान में लेजाके डो सौ कोड़े लगाओ।

– पर साहब, मैं तो आपके खिलाफ़ नहीं हूँ!

– साला, फिर झूट बोलटा!

– गुस्ताखी मुआफ़, हुजूर, पर ये सही कह रहा है। ये तो दोस्त रियासत की दोस्त पार्टी का है। हिंदुस्तान में बी जे पी का एम पी है। हिंदुस्तान के बारे में तो आप जानते ही हैं, और इसकी पार्टी भी बड़ी वफ़ादार पार्टी है। हिंदुस्तान की सबसे वफ़ादार पार्टी है।

– टो ये अपने नाम में आजाड काए को लगाए है? खैर, इसको लेजाके डो घंटे कोठरी में बंद कर डो।

– हुज़ूर, ये तो ज्यादती हो जाएगी। सरकार बहादुर का तो नाम है इंसाफ़ के लिए।

– टुम ठीक कहटा है। फिर भी सबक डेना टो ज़रूरी है। इसे डो घंटे उधर बेंच पर बिठा डो।

– जी हुज़ूर। बिल्कुल जाय़ज़ सज़ा मुकर्रर की है साहब ने। .. आओ, चलो।

– पर ये तो ज़्यादती है!

– अरे, ख़ैर मनाओ। तुम बी जे पी के हो और एम पी हो और यहीं से वर्ल्ड कप जीत के गए थे। अगर नहीं होते और आंध्र प्रदेश या उड़ीसा या, भगवान न करे, छत्तीसगढ़ में आंदोलन वगैरह से जुड़े होते तो कौन जाने शायद यहाँ से तुमको उठा के ले जाया जाता और एन्काउंटर भी हो सकता था।

– पर मेरे नाम में आज़ाद तो …

– पता है, पता है! पर आज़ादी का फ़ैशन अब चला गया। दुनिया आगे बढ़ गई है और तुम्हारा नाम पुराना पड़ गया है और खतरनाक बन गया है।

– अच्छा ठीक है, पर बी जे पी से क्या? राज तो अभी कौंग्रेस का है …

– कौंग्रेस के होते तो भी बच जाते। वो भी तो दोस्त पार्टी है। … तुम्हारे अकेले के साथ ही ऐसा नहीं हुआ है। दरअसल कॉरपोरेश बहादुर, जिनके राज में कभी सूरज अस्त नहीं होता, आजकल काफ़ी सख्ती बरत रही है। किसी भी तरह की बग़ावत को एकदम बर्दाश्त नहीं करेगी। तुमने सुना ही होगा, आजकल तो राष्ट्रपतियों को भी नहीं बख्शा जाता, एम पी की तो छोड़ो।

– तो दो घंटे क्या होगा?

– कुछ नहीं, आराम से बैठकर सज़ा की फ़ॉर्मेल्टी पूरी करो। यह सोच लेना किसी और को सज़ा दी जा रही है। हमारे साहब बहादुर को क्या तुम बेवकूफ़ समझते हो? ऐसे ही थोड़े ही ना कह दिया है। अब तुम एम पी हो और वर्ल्ड कप विजेता हो तो खबर तो बनेगी ही। यह खबर दूसरों के लिए सबक का काम करेगी। कोई बड़ी बात नहीं है। … और तुम्हारी पार्टी चाहे तो इसका भी चुनाव में इस्तेमाल कर सकती है … इसी आज़ाद नाम को लेकर … क्या समझे?

– पर इज़्ज़त भी तो कोई चीज़ होती है। एम पी की भी तो कुछ हैसियत होती है।

– अरे अब छोड़ो भी! अब नाम ऐसा है तो थोड़ा भुगतना तो पड़ेगा ही। ऐसा करना, वापस पहुँच कर प्रेस को एक बयान दे देना। मन हल्का हो जाएगा।

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