अनिल एकलव्य ⇔ Anil Eklavya

About

छोड़िए जनाब, इस सबमें कुछ रक्खा नहीं है।

मैं सांगणिक भाषाविज्ञान (Computational Linguistics) में एक शोधकर्ता हूँ। इसके अलावा मैं पढ़ता हूँ, पढ़ता हूँ, पढ़ता हूँ, और कुछ लिखने की कोशिश भी करता हूँ। हाल ही मैं मैने ज़ेडनेट का हिन्दी संस्करण भी शुरू किया है। एक छोटी सी शुरुआत है। उम्मीद करता हूँ और लोग भी इसमें भाग लेंगे और ज़ेडनेट/ज़ेडमैग के सर्वोत्तम लेखों का हिन्दी (जो कि अपने दूसरे रूप उर्दू के साथ करोड़ों लोगों की भाषा है) में अनुवाद किया जा सकेगा।

I am a researcher in Computational Linguistics and a developer of language related software (mostly open source and free). I also write and translate a bit and do other things like posting on this blog, apart from watching movies, listening to music and reading and reading and reading…

I am definitely not this Anil Kumar Singh, but I could be this Anil Kumar Singh.

P.S.: This blog actually has a subtitle called ‘The Informal Blog of a Computational Linguist’, by which I had entered it in places like the ACL Wiki and the Linguist List. As it happens, after repeated tries, I couldn’t find a satisfactory theme for this blog that would also display the subtitle. But believe me: it’s really there.

13 Comments »

  1. सराहनीय प्रयास अच्छा लगा आपको पढना ..काफी अच्छी अच्छी रचनाएं हैं आपकी.जल्दी ही फिर आना होगा .Hindi Kavita

    Comment by Hindi Sagar — January 20, 2008 @ 2:29 pm | Reply

  2. धन्यवाद। स्वागत रहेगा आपका।

    Comment by anileklavya — January 20, 2008 @ 6:59 pm | Reply

  3. Namastey Anil Sahab,
    Appreciate your contribution to the Hindi z net. Your writings are great!
    I am an Indian leaving in France. I speak Hindi, Urdu, Bengali, English and French. Working with an human rights organisation and also as a court interpreter and translator (assermenté) in Paris. (I am znet sustainer). Though I don’t have a lot of time in my disposition but would love to give you a hand in translating articles in Hindi for z net. Please let me know what you think!
    Très bonne journée
    Amitié,
    Sarfaraz

    Comment by Sarfaraz Ahmed — June 26, 2008 @ 4:39 pm | Reply

  4. नमस्ते सरफ़राज साहब,

    धन्यवाद! अनुवाद में मदद करने के लिए आपका स्वागत है। आपको बस इतना करना है कि अपना ज़ेड (या ज़ी, जो भी कहें) पर कोई भी मनपसंद लेख चुन लें और उसका अनुवाद करके मुझे भेज दें। आप आधा-अधूरा अनुवाद करके भी भेजें तो उसे पूरा करने की मैं कोशिश करूंगा। एक अन्य संभावना यह है कि आप नये अनुवाद किए लेखों की प्रूफ़-रीडिंग या संपादन कर दें।

    फि़लहाल इतना ही, आगे संपर्क आप कभी भी कर सकते हैं।

    – शुभकामनाएं

    Comment by anileklavya — June 26, 2008 @ 7:40 pm | Reply

  5. एक और बात सरफ़राज साहब। ज़ेड नेट का उर्दू संस्करण भी शुरू करने की बात मेरे दिमाग़ में काफ़ी समय से है पर उर्दू लिपी मुझे कुछ खास नहीं आती। आपका इस बारे में कोई सुझाव हो तो आभार रहेगा।

    Comment by anileklavya — June 26, 2008 @ 7:48 pm | Reply

  6. OK, I will start by translating the article of my choice. One article per month may be, in the beginning! I can also do the proofreading of the articles already translated, as you suggest. For the znet urdu edition, it is really very important and thank you for thinking to start it. I will be happy to help you in this regard. Let me know how I can help you. May be you would like me to start translating in urdu or proofread your urdu translations instead?
    Other thing, I have a little souci of hindi/urdu font(script). For urdu I have a software called urdu editor. For Hindi I use a hindi font (called ‘suman’) in WORD.
    (And I am not able to write to you in Hindi with the help of my software!)
    Please let me know everything that I should know about writing the texts in hindi/urdu and how to send them to you.
    A bientôt
    Sarfaraz

    Comment by Sarfaraz Ahmed — June 27, 2008 @ 1:59 pm | Reply

  7. एक महीने में एक लेख का अनुवाद भी आप कर पाएं तो मेरे लिए बहुत उत्साहजनक होगा। आप अनुवाद शुरू करें, बाकी तकनीकी मुद्दों के बारे में मैं जल्दी ही आपको मेल लिखता हूं। और उर्दू संस्करण के बारे में भी।

    उम्मीद है अब हिन्दी संस्करण कुछ तेज़ी पकड़ेगा।

    Comment by anileklavya — June 27, 2008 @ 5:23 pm | Reply

  8. अनिल साहब।
    मैने कुछ दिन हुए एक लेख का हिंदी अनुवाद आपको भेजा है।
    पता नहीं आपको मिला या नहीं।
    आपके मेल का इनतेज़ार है।
    आदाब।
    सरफ़राज़।

    Comment by sarfaraz ahmed — August 28, 2008 @ 7:11 pm | Reply

  9. जी, आपका लेख मुझे मिल गया था। मैंने जवाब भी भेजा था। क्योंकि लेख यूनीकोड में नहीं है, इसलिए उसे कन्वर्ट करके शामिल करने में थोड़ा सा समय लगेगा।

    आपको भेजी मेल बाउंस हो रही है। कोई अन्य पता हो तो मेल करें।

    Comment by anileklavya — August 29, 2008 @ 4:25 am | Reply

  10. अनिल जी,
    भारत यात्रा से पिछले हफते लौटा हूं। जाने से पहले आपको कुछ अनुवाद भेजे थे। उत्तर न मिलने पर ख़दशा हो रहा है कि शायद मेरी मेल आपको नहीं मिली है।
    आपके उत्तर का इनतेज़ार है।
    सरफ़राज़।

    Comment by सरफ़राज़ — October 25, 2008 @ 7:45 pm | Reply

  11. सरफ़राज़ जी,

    आपका चॉम्स्की के उद्धरणों वाला लेख मुझे मिला था। उसके बाद आपने अरुंधती राय वाला लेख (यूनीकोड में) मांगा था जिसे आपने कहा था आप प्रूफ रीड कर देंगे। वो लेख मैंने भेज दिया था और उसी का इंतज़ार कर रहा था ताकि दोनों को साथ ज़ेड को भेजा जा सके। अगर उसके बाद आपने कुछ भेजा है तो मुझे नही मिला है।

    आप उस लेख का प्रूफ़ देख कर भेज दें तो मैं दोनों को साथ ज़ेड को भेज दूंगा।

    Comment by anileklavya — October 26, 2008 @ 8:42 am | Reply

  12. अनिल जी, अरुंधती राय वाला लेख (यूनीकोड में) प्रूफ रीड कर के मैंने आपको 15/09/2008 को भेज दिया था। जिसके प्राप्ति की पुष्टि की मेल भी आपने मुझे भेजी थी! Anyway लेख फिर से भेज रहा हूं। मेल की गड़बड़ी के लिए खेद है।
    सरफ़राज

    Comment by सरफ़राज — October 27, 2008 @ 12:36 am | Reply

  13. Thanks a lot Mr.Anil for connecting me with http://www.kavitakosh.org

    Comment by ध्रुव : North Star …………………… (Dhruv) — January 9, 2011 @ 11:41 pm | Reply


RSS feed for comments on this post. TrackBack URI

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Blog at WordPress.com.