अनिल एकलव्य ⇔ Anil Eklavya

July 21, 2010

भाव खाना

कुछ लोगों को भवसागर में आने से लेकर
भवसागर पार हो जाने तक लगातार
बहुत चाव से भाव खिलाया जाता है
यहाँ तक कि कभी-कभी तो उनको
भाव ही बहुत सस्ता लगने लगता है

कुछ और लोग होते हैं जो आने के बाद
कभी, कहीं, किसी तरह दूसरे लोगों से
भाव खाने का हक हासिल कर लेते हैं

ऐसे लोगों की तो गिनती ही नहीं है जो
बावर्दी या मुफ़्ती, तलवार से या मीठी छुरी से
बहुतों से बहुत सा भाव छीनने के एवज में
अपने लिए भी और अपनों के लिए भी
अपने और अपनों के सपनों के लिए भी
जितना हो सके भाव का इनाम पा लेते हैं

ऐसे भी होते हैं जिन्हें घूमते-घामते ही
हालात का चक्का बिना किसी कारण
औरों से भाव खाने का परमिट दे जाता है

बाकी रहे वो जिन्हें काव-काव करके
अपनी ज़बान तमाम जला डालने
या मुँह ही सिलने-सिलवा-लेने पर भी
कोई रत्ती भर भाव देने को राज़ी नहीं होता

उन्हें तहज़ीब को ऊपर ताक पर रख कर
पालथी मार कर और हाथ धो-धाकर
जो भी जितना भी जैसा भी और जब भी जुटे
रोकर हँस कर या बुद्धं शरणं सा भाव धर कर
खुद ही खुद को भाव खिलाना पड़ता है

May 10, 2008

साम्राज्य और साइकल

संपन्न शक्तिशाली साम्राज्य
जो कि सुना है
आश्चर्यजनक रूप से
सुसंस्कृत भी था
जहाँ तेनालीराम जैसे दरबारी
कुछ वैसे ही रहते थे
जैसे अकबर के यहाँ बीरबल

बड़ी घटिया उपमा है
पर मैं झूठ बोलने से
बचना चाह रहा हूं
वैसे भी मैं कवि नहीं हूं
मेरी बोली तो
खड़ी बोली है

तो खड़ी बोली में
कहा जाए तो
बारिश का मौसम है
रिमझिम रिमझिम
इतनी ही कि कैमरा भी
बचा के रखा जा सके
तस्वीर खींचते हुए भी

भीड़ वगैरह भी नहीं है
आप आराम से भ्रमण का
पूरा मज़ा ले सकते हैं

छोटे-छोटे पहाड़
बड़ी-बड़ी चट्टानें
साफ़-सुथरी सड़कें
सब तरफ पेड़-पौधे
पत्तियाँ भी घास भी
फूल भी और उन पर
मंडराने वाले भी
तितलियाँ भी होनी चाहिए
पर आखिरी दो मदों की
याद मुझे नहीं आती
भूल-चूक लेनी-देनी

ऊपर ऐसे बादल
कि तस्वीर खींचने से
मन ही न भरे
और हाँ
नदी भी तो है
अपने उफान के चरम पर
लेकिन छोटे से साम्राज्य की
छोटी सी तो नदी है
इसलिए चरम भी
छोटा सा ही तो होगा

सुना है हमेशा ऐसा नहीं होता
भ्रमण के भी मौसम होते हैं
तब हर तरफ भीड़ होती है
ऐसी सफाई और हरियाली भी
नहीं पाएंगे आप
नदी में इतना पानी भी
नहीं पाएंगे आप
रिमझिम बारिश तो खैर
नहीं ही पाएंगे आप

मुझे पता नहीं था
तकदीर (कभी तो) अच्छी थी

लेकिन एक बात है
क्या तब भी यहाँ घूमने में
इतना ही मज़ा आता होगा
जब कि साम्राज्य गिरा नहीं था

दो हज़ार साल पहले के
रोम में भ्रमण का मज़ा
कितना आता होगा
यह किससे पूछा जाए

साम्राज्य और साइकल

दो-तीन राजधानियों की बात
तो जानता हूं मैं
चतुर दरबारी तो
वहाँ भी बहुत से हैं
लेकिन भ्रमण तो …

जाने दीजिए

मेरा तो मन हो रहा है
मैं भी एक साइकल
किराये पर लेकर
फिर से घूमने निकल जाऊं

वाहन पर चढ़ कर जाऊं वहाँ
पहले पैदल गया था जहाँ

कुछ तो तुक हो

थक जाने पर साइकल को
पेड़ के नीचे खड़ा करके
आराम किया जा सकता है

पतन को पा चुके साम्राज्य में
रिमझिम रिमझिम
बारिश के मौसम में
लगभग आकर्षक रूप से
घुमावदार और चढ़ावदार
लगभग स्वाभाविक रूप से
कच्ची और टूटी-फूटी
सड़क के किनारे
लगभग अपेक्षित रूप से
धीर-गंभीर और छायादार
लगभग निराशाजनक रूप से
छोटे और हल्के-फुल्के
एक पेड़ के नीचे
खड़ी हुई एक साइकल

सड़क के होने का
रहस्य बताते हुए

और शायद साम्राज्य
के न होने का भी

जहाँ साम्राज्य था
वहाँ अब साइकल है
पर मुझे कुछ खास
अफ़सोस भी नहीं है

यहाँ तो फ़िलहाल मुझे
साइकल, पेड़ और सड़क
काफ़ी भा रहे हैं
जहाँ पृष्ठभूमि में स्थित है
साम्राज्य का एक अवशेष

 

[2008]

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