अनिल एकलव्य ⇔ Anil Eklavya

February 22, 2009

बाल की खाल

ज्ञान-विज्ञान के विकास में लगे
अति-विशेषज्ञ का काम है
बाल की खाल निकालना
इसके बहुत से लाभ हो सकते हैं
लेकिन तभी तक
जब तक खाल निकाल कर
बाल के अंदर की कोशिका के
अध्ययन में डूबे हुए
यह न भुला दिया जाए
कि इसी बाल में ऐसी
अनेकों कोशिकाएँ हैं
कि इन कोशिकाओं के ऊपर
खाल भी थी
जो निकाल दी गई
और जिसको मिला कर ही
एक पूरा बाल बनता है
कि ऐसे लाखों बालों की जड़
एक सिर पर स्थित है
और यह सिर
कई और अंगों के साथ मिलाकर
एक शरीर बनाता है
और ऐसे अरबों शरीर मौजूद हैं
यही नहीं, तरह-तरह के अन्य शरीर भी हैं
जिनमें से प्रत्येक
बड़ी संख्या में
(लुप्त होती प्रजातियों के अलावा)
पाये जा सकते हैं

ये सभी शरीर
एक बड़े-से (या छोटे-से) गोले पर रहते हैं
जिस पर शरीरों के अतिरिक्त भी बहुत कुछ है
और ऐसे अनगिनत गोले
इधर-उधर चक्कर लगाते फिर रहे हैं
इनमें से बहुतों पर
शरीर हो सकते हैं
जिन पर सिर हो सकते हैं
सिरों पर बाल हो सकते हैं
बालों पर (खाल निकालने के बाद)
कोशिकाएँ भी मिल सकती हैं
जो शायद वैसी ही हों
जैसी का अध्ययन किया जा रहा है
या शायद ना भी हों

बाल के अंदर की कोशिका के
अध्ययन में डूब कर
सब कुछ भुला देने की
ग़लती न करना तो ठीक है
लेकिन यह भुलाना भी
खतरे से ख़ाली नहीं है
कि जिस अनगिनत गोलों के
ब्रह्मांड के बारे में
बात की जा रही है
उसमें से कुछ पर ही
शरीर पाये जाते हैं
जिनके सिर
हो भी सकते हैं, नहीं भी
और सिर पर बाल (यदि हों तो)
उनके अंदर सूक्ष्म कोशिकाएँ
मिल सकती हैं
जिनके अध्ययन से
ऐसे निष्कर्ष निकल सकते हैं
जो ब्रह्मांड (या उसके कुछ भाग)
के बारे में दिए जा रहे
निर्णयों-फ़तवों को
ग़लत साबित कर सकते हैं

 

[1997 या 1998]

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