अनिल एकलव्य ⇔ Anil Eklavya

May 4, 2010

सूरज-चांद

सूरज क्यों जल रहा है?
क्यों खुदकुशी कर रहा है?
शहीद होना चाह रहा है?

बुरी बात है, बुरी बात है

जल रहा है और जला रहा है
जल-जला के कह रहा है
जल रहा हूँ मैं जल रहा हूँ

बुरी बात है, बुरी बात है

पता नहीं क्या लाखों सूरज
इससे अनगिन बड़े निरंतर
जल भी रहे हैं जला भी रहे हैं

बुरी बात है, बुरी बात है

चांद का क्या ख़्याल है?

Advertisements

January 30, 2009

शहीदों को नमन

शहीद दिवस पर हम करते हैं
तमाम शहीदों को हार्दिक नमन

बेशक बहुत शुभ रहा है
हमारे लिए जितना उनका जीवन
उतना ही उनका असमय मरण

तो आइए करते हैं इस दिन यह प्रण
भविष्य के हम जैसे लोगों के लिए इसी क्षण
निभाते रहेंगे हम दुनिया की प्राचीन रीत
बनाते रहेंगे हम नये-नये शहीद

 

[2009]

Blog at WordPress.com.