अनिल एकलव्य ⇔ Anil Eklavya

April 19, 2008

हिन्दी ज़ेडनेट – नये अनुवाद (1)

तो आखिर मैंने हिन्दी ज़ेडनेट के लिए तीन और अनुवाद पूरे कर ही दिए। इतना समय लगने का एक कारण यह था (इसके अलावा कि मेरी उम्मीद के विपरीत और कोई अभी तक इस काम में शामिल होने के लिए आगे नहीं आया है) कि एक लेख काफ़ी लंबा था और उसमें दो कविताओं के उद्धरण थे, जिनमें से एक शायद दुनिया की सबसे अधिक पढ़ी गई कविताओं में से एक है।

उम्मीद है कविता अनुवाद के बाद भी कविता जैसी ही लगेगी।

नये अनुवाद ये हैं:

  • ग़ैर-टिकाऊ अविकास: नोम चॉम्स्की
  • कला, सच और राजनीति: हैरॉल्ड पिंटर
  • सभ्यताओं का टकराव: नोम चॉम्स्की

और हाँ, ज़ेडनेट की साइट पूरी तरह बदली जा रही है, परिणामतः हिन्दी ज़ेडनेट भी यहाँ से अब यहाँ आ गया है।

और यह भी कि कुल अनुवादों की संख्या अब एक दहाई यानी दो अंकों तक पहुंच गई है।

तीन अंकों तक अकेले पहुंचाना मुश्किल होगा, फिर भी…

Create a free website or blog at WordPress.com.