अनिल एकलव्य ⇔ Anil Eklavya

July 5, 2010

The (Not So) Secret Logo of India Inc.

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A Trophy of the Operation Green Hunt

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February 3, 2009

शांति का ब्याह

बापू को ले गए डाकू
भगत सिंह को दुबारा फाँसी हो गई
सुभाष के तो फूलों का ही ठीक नहीं
और शांति का हो गया ब्याह

लक्ष्मी सेठ की तिजोरी में बंद हैं
विष्णु सुना है किसी रिज़ॉर्ट में
हैं और विरह में तड़प रहे हैं
ब्रह्मा जनसंख्या नियंत्रण की
अनवरत कोशिश में लगे हैं
भोलेनाथ को भस्मासुर से
बचाने के लिए कोई नहीं आया
शक्ति पर अब महाशक्ति का पेटेंट है
सरस्वती तस्वीर में बंद थीं
जिसे किसी ने जला डाला

अर्जुन कभी हरम बनाता है
कभी बृहन्नला बन जाता है
द्रौपदी फ़ैशन मॉडलिंग में है
भीम डब्ल्यू डब्ल्यू एफ़ में है
कर्ण कार दुर्घटना में नहीं रहा
कन्हैया का कहीं पता नहीं है

विश्वामित्र की तपस्या के लिए
जंगल में जगह ही नहीं बची
वो ऐल्कोहोलिस्म में जा फँसे हैं

एक महावीर ने वैष्णव ढाबों
की चेन खोल ली है
दूसरे का अपहरण कर लिया है
उनके प्रभु के साथ
एक आतंकवादी गुट ने
दूसरे आतंकवादी गुट से लड़ाई में
जिसकी क़ैद में हैं अरब के पैंगबर
बुद्ध एक विस्फोट का शिकार हो गए
हालांकि बहुत से बहुरूपिए
बुद्ध के भेस में घूम रहे हैं
और ईसा ने मेल जिबसन की
फ़िल्म कंपनी ज्वाइन कर ली

एकलव्य की खटपट हो गई
द्रोण से भी और धृतराष्ट्र से भी
उसका अंगूठा काट लिया गया
वैसे वो अब भी लगा पड़ा है
पर अफ़वाह है कि सदमे से
उसका सिर फिर गया है

जैसा कि ऊपर कहा गया
बापू को ले गए डाकू
शांति का हो गया ब्याह
और एकलव्य का फिर गया सिर
वगैरह वगैरह वगैरह

तो आप आजकल क्या कर रहे हैं?

 

[2009]

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